निवास -बायरन बाज़ार,रायपुर ।
जिला- रायपुर,छत्तीसगढ़ ।
शीर्षक--" कृष्ण-लीला "
विधा-छंद-मुक्त (कविता) ।
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==$$!!* कृष्ण-लीला *!!$$==
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देवकीनन्दन,यशोदा मैय्या के दुलारे,
नटखट नंदलाला,बृजवासीयों के प्यारे।
चंद्रमा की छवि,पानी में देख,
उसको पा लेने की,हठ थी भारी ।
शेषनाग को,बहुत ही,नाच नचाये,
पूतना के,मयावी रूप से डर न पाये।
गोप संग रहे और नाम गोपाला धराया
गायों को चराया,गोवर्धन पर्वत उठाया।
गोपियां बीच राधा,चोरी से वस्त्र चुराया
राधा व सखियाँ संग,मधुबन में कैसा रास रचाया ।
श्याम रँग धरि,श्यामसुंदर कहलाया,
मुख-रसनी बाँसुरी को बना,बंशीधर नाम रखवाया ।
द्रोपदी द्वारा की,सहायता का कर्ज चुकाया,
महाभारत में,हुये चीरहरण की घटना से,
वस्त्रहीन होती,द्रोपदी की,वस्त्र लुटाकर ,मर्यादा को बचाया ।
विह्ननला को,किसने अर्जुन बनाया,
पाण्डवों को,अपनी सुझ से,युद्ध में जीत दिलवाया ।
सुदर्शन चक्र के धारी,ज्ञान दे,
गीता उपदेशक ग्रंथ है,रचवाया,
मानव को,कर्म किये जा,फल की चिंता न करें ,ऐसा अनूठा पाठ है,पढ़ाया ।
हे !गिरधारी-मुरलीधर,श्यामबिहारी,
लीलाधर,भवसागर पार,लगाओ हमारी।
कोरोना के दंश ने,आज मथुरा का,
रँग किया है फीका,
तेरे भक्तों की,भक्ति से,मोह न हो पाया फीका ।
===जय राधे,राधे-कृष्ण,राधे-राधे--
तेरे सारे भक्त,आज दिल से पुकारे ==
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