स्थान-----नवापाराखुर्द/सक्ती
जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा---छंद मुक्त कविता
शीर्षक --अधूरी ख्वाहिशें
व्याख्या ---कवि के द्वारा ख्वाहिशों का होना जीवन में आगे बढ़ने के लिए बहुत ही आवश्यक है । लेकिन ख्वाहिशों को पूरा करने के लिए एक व्यक्ति को क्या क्या करना पड़ता है ,ख्वाहिशों के चक्कर में उसे क्या से क्या बनना पड़ता है वर्णन किया गया है।
************************************************
अधूरी ख्वाहिशें
अधूरे ख्वाहिशें ही हमें,.... जीवन भर रुलाता है ।
निकम्मा, असफल, कामचोर, कहकर चिढ़ाता है ।
उसे पूरा करने में हम,.....सारा जीवन खपाते हैं ।
तभी कुछ पूरे होते,और कुछ अधूरा रह जाता है ।
ख्वाहिशों को पूरा करना,...हम सहज न समझें ।
कभी सही और कभी ,गलत राह पर ले जाता है ।
ख्वाहिशें पालकर बैठे हुए, उन लोगों से पूछलो ।
जीवन में वह क्या क्या, सबको नाच नचाता है ।
बात सही भी है ,ख्वाहिश के बिना जिंदगी कैसी ।
अगर थोड़ा भी है , कहां से कहां तक ले जाता है ।
ख्वाहिश अच्छी चीज है, अच्छी परिभाषा में बांधिए ।
उसी के सहारे मानव धरा में ,क्या से क्या हो जाता है।
जब तक है जीवन,अपनी ख्वाहिश जरुर पूरा कीजिए ।
जीवन के दामन में यह अनेकों, खुशियां भर जाता है ।
ख्वाहिशें सागर में हो डूबने की, ...…..मोती ही मिलेगा ।
ख्वाहिशें हिमालय में हो चढ़ने की, सरलता से हो जाता है ।
गगन में उड़ने की कभी, किसी ने ख्वाहिश नहीं पाली ।
अगर कोई पाला होता समझ जाता, कैसे उड़ा जाता है ।
ख्वाहिशें हमारी सीमाओं से ,कभी लांघते बस न हों ।
लांघेगे जिस दिन उसी दिन, खुद को डूबा जाता है ।
गिरधारी लाल चौहान
No comments:
Post a Comment