जिला-कोरबा छत्तीसगढ़
विधा- अधूरी ख्वाहिश पर छंद मुक्त कविता
शीर्षक-" ख्वाहिशें "
प्रस्तुत है कविता--
मेरी भी इक ख्वाहिश थी कि
मेरा भी एक घर होगा
मेरे घर के आँगन में
फूलों भरा चमन होगा।
लेकिन रब को ये मंजूर कहाँ,
सब को सब कुछ दे जाना
मेरी आँखें लबरेज़ यहाँ
किसलिए कोई पूछ न जाना
शायद रब की इच्छा थी अधूरी ख्वाहिश लेकर जीना ।
मेरी भी तमन्ना थी
मेरे भी कल पर होंगे
मुझमें ही सामर्थ्य नही था,
आसमान में उड़ पाती
या ईश्वर की ही इच्छा थी,
अधूरी ख्वाहिश लेकर जीना ।
बहुत सुंदर रचना
ReplyDeleteबहुत सुंदर गोमती , बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं ����
ReplyDeleteशीर्षक के अनुरूप बहुत सुंदर रचना 👌
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