जिला - बलौदा बाजार ( छ. ग. )
विषय - अधूरी ख्वाहिशें
विधा - छंद मुक्त कविता
शीर्षक - अधूरी इच्छायें
बचपन से आज तक
मैं तैरता रहा हूँ
इच्छाओं के महासागर मे ।
अनंत इच्छाओं की ये लहरें
नहीं समाती
मेरे मन की गागर मे ।
मैं व्याकुल , अधीर ,
परेशान हूँ
क्योंकि इच्छायें
कुछ पूरी
कुछ अधूरी
जो दे गई मजबूरी ,
जीवन को गुजारने का
जीने का नहीं ।
लेकिन
जब से मैंने जाना कि
इस अतृप्त संसार मे
या कहो ,
क्षणभंगुर विनाशी जीवन मे -
इच्छामात्र दुःखदायी है ।
तब से
छोड़ दिया है
बोझ उठाना
व्यर्थ इच्छाओं का ।
केवल आवश्यकतायें
हो जाती है पूर्ण ,
और इच्छायें
अधूरी , अपूर्ण ।
इच्छा ,वासना
एवं मन की गुलामी से
अब मैं
बहुत दूर जा चुका हूँ ,
इसीलिए
मेरे जीवन मे
आनन्द है ,शान्ति है ,
तृप्ति और मुक्ति है ।
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