Tuesday, August 18, 2020

बलौदाबाजार से लीलाधर प्रजापति की रचना- अधूरी ख्वाहिशें

रचनाकार - लीलाधर प्रजापति
जिला - बलौदा बाजार ( छ. ग. )
विषय - अधूरी ख्वाहिशें
विधा - छंद मुक्त कविता
शीर्षक - अधूरी इच्छायें

बचपन से आज तक
मैं तैरता रहा हूँ
इच्छाओं के महासागर मे ।
अनंत इच्छाओं की ये लहरें
नहीं समाती
मेरे मन की गागर मे ।
मैं व्याकुल , अधीर ,
परेशान हूँ 
क्योंकि इच्छायें
कुछ पूरी
कुछ अधूरी
जो दे गई मजबूरी ,
जीवन को गुजारने का 
जीने का नहीं ।
लेकिन
जब से मैंने जाना कि 
इस अतृप्त संसार मे 
या कहो ,
क्षणभंगुर विनाशी जीवन मे -
इच्छामात्र दुःखदायी है ।
तब से
छोड़ दिया है
बोझ उठाना
व्यर्थ इच्छाओं का ।
केवल आवश्यकतायें
हो जाती है पूर्ण ,
और इच्छायें
अधूरी , अपूर्ण ।
इच्छा ,वासना 
एवं मन की गुलामी से 
अब मैं 
बहुत दूर जा चुका हूँ  ,
इसीलिए
मेरे जीवन मे 
आनन्द है ,शान्ति है ,
तृप्ति और मुक्ति है ।

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