रायगढ़, छत्तीसगढ़
विधा-छंद मुक्त
विषय - रक्षाबंधन (अनुप्रास अलंकार)
शीर्षक- रक्षाबंधन आया
आया-आया रक्षाबंधन आया
बहन ने राखी का थाल सजाया
उम्मीदों ,आशाओं को सज़ा
आज भाई की बलैयां लेती वह
बार-बार कामना करती
भाई की सफलता और लंबी उम्र की
एक मधुर मुस्कान मुख पे सज़ा
तकती वह भाई के मुखड़े को
एक और बार बचपन जी
लेने का मौसम आया
आया-आया रक्षाबंधन आया
आया-आया रक्षाबंधन आया
पर कई भाइयों और बहनों के
नसीब में खुशियां ना आया
कुछ को कोरोना ने निगल लिया
तो कुछ ने सरहद में प्राण गंवाया
उनके थाल से रोली अक्षत रुठ गए
रक्षा के रेशमी धागे आज टूट गए
ये राखी समर्पित उन भाइयों को
जो हमारी रक्षा में शहीद हुए
एक रक्षासूत्र उनको जो अस्पतालों,
गलियों,सड़को, और सरहदों पर
हमारे लिए हैं डटे हुए
आया-आया रक्षाबंधन आया।
No comments:
Post a Comment