जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा---कविता(अनुप्रास अलंकार पर आधारित)
शीर्षक --- संसार में रक्षाबंधन
व्याख्या ---कवि के द्वारा रक्षा बंधन भाई बहन के स्नेह का त्यौहार समूचे जगत में मनाने का वर्णन किया गया है ।
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संसार में रक्षाबंधन
रक्षा बंधन का त्यौहार ,थोड़ा सा अलग इस बार ।
मन में कोरोना का भय, फिर भी खुशियां अपार ।
आंगन आंगन आकर बहना,बांध रही राखी ।
सावन पावन मनभावन, यह माह बनी साखी ।
भाई बहन को दे रहा आज, मनचाहा उपहार ।
सजे संवरे सबके घर, खुशियां झूम है रही ।
कुछ बहने भाई घर आ न सकी ,यह दुख रही ।
कोई कुछ कहे अवसर ,नहीं आते बार बार ।
गगन का आज मन मगन,धरा ने बांधी राखी ।
सूरज के हाथों में सजी, जैसे मेरे हाथ की राखी ।
धरती ने पाई आज, बड़ी खूबसूरत उपहार ।
पूरवाई की अति सुंदर राखी ,मेघ को पहनाई है ।
देख इन्द्र उसे चकित हुए,पूछे किसने यह बनाई है ।
मैं भी ऐसे ही बंधवाऊंगा, कहने लगे बार बार ।
नदी ने सागर को पहनाई,मन गदगद हो गया ।
सबके हाथों राखी सजी ,चौदह भुवन एक हो गया ।
खिल खिलाता हंसता मुस्कुराता, पाया यह संसार ।
पेड़ भी राखी पहने -पहने, रक्षाबंधन पर्व मनाये ।
जैसे हम बांधा करते, वही लोकाचार अपनाये ।
मानव की सारी रीतियां,सब कर रहे स्वीकार ।
भारत आज पहना है राखी, हिंदू ,मुस्लिम ,सिख ,इसाई के नाम ।
देखो रक्षाबंधन का त्योहार लाता है , कितना सुन्दर सुखद पैगाम ।
सब कहो इसी तरह मनाया करेंगे,हम रक्षाबंधन बार बार ।
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