Monday, August 3, 2020

जांजगीर-चांपा से गिरधारी लाल चौहान की रचना- रक्षाबंधन

नाम----गिरधारी लाल चौहान
जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ

विधा---कविता(अनुप्रास अलंकार  पर आधारित)
शीर्षक --- संसार में रक्षाबंधन
व्याख्या ---कवि के द्वारा रक्षा बंधन भाई बहन के स्नेह का त्यौहार समूचे जगत में मनाने का वर्णन किया गया है ।

************************************************
                संसार में रक्षाबंधन
रक्षा बंधन का त्यौहार ,थोड़ा सा अलग इस बार ।
मन में कोरोना का भय, फिर भी खुशियां अपार ।

आंगन आंगन आकर  बहना,बांध रही राखी ।
सावन पावन मनभावन, यह माह बनी साखी ।
भाई बहन को दे रहा आज, मनचाहा उपहार ।

सजे संवरे सबके घर, खुशियां झूम है रही ।
कुछ बहने भाई घर आ न सकी ,यह दुख रही ।
कोई कुछ कहे अवसर ,नहीं आते बार बार ।

गगन का आज मन मगन,धरा ने बांधी राखी ।
सूरज के हाथों में सजी, जैसे मेरे हाथ की राखी ।
धरती ने पाई आज, बड़ी खूबसूरत उपहार ‌।

पूरवाई की अति सुंदर राखी ,मेघ को पहनाई है ।
देख इन्द्र उसे चकित हुए,पूछे किसने यह बनाई है ।
मैं भी ऐसे ही बंधवाऊंगा, कहने लगे बार बार ।

नदी ने सागर को पहनाई,मन गदगद हो गया ।
सबके हाथों राखी सजी ,चौदह भुवन एक हो गया ।
खिल खिलाता हंसता मुस्कुराता, पाया  यह संसार ।

पेड़ भी राखी पहने -पहने, रक्षाबंधन पर्व मनाये ।
जैसे हम बांधा करते, वही लोकाचार अपनाये ।
मानव की सारी रीतियां,सब कर रहे स्वीकार ।

भारत आज पहना है राखी, हिंदू ,मुस्लिम ,सिख ,इसाई के नाम ।
देखो रक्षाबंधन  का त्योहार लाता है , कितना सुन्दर सुखद पैगाम ।
सब कहो इसी तरह  मनाया करेंगे,हम रक्षाबंधन बार बार ।

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...