कवयित्री -प्रीति चौधरी "मनोरमा"
जिला - बुलन्दशहर
राज्य - उत्तरप्रदेश
शीर्षक कृष्ण जन्माष्टमी
सुन लो विनती हे त्रिपुरारी,
मैं हूँ मीरा सम भक्त तुम्हारी।
आकर बस जाओ उर के निलय में,
भक्ति रस भर दो शुष्क हृदय में,
रम जाए मन तेरी जय-जय में,
हर लो हृदय की पीर हमारी
सुन लो विनती हे त्रिपुरारी।
तुम हो चीर बढ़ाने वाले,
भगिनी की लाज बचाने वाले,
सतियों के सत के रखवाले,
रक्षक बन जाओ हे गिरधारी,
सुन लो विनती हे त्रिपुरारी।
कान्हा तुम घट-घट के वासी,
दूर करो जीवन से उदासी,
मैं तेरे दर्शन की प्यासी,
आ जाओ गोविंद मुरारी,
सुन लो विनती हे त्रिपुरारी।
मनमोहक है बाँसुरी की तान,
सुनने को आतुर हैं कान,
तुम हो मेरी देह की जान,
बाँकी छवि लगती है प्यारी,
सुन लो विनती हे त्रिपुरारी।
प्रीति चौधरी "मनोरमा"
जनपद बुलन्दशहर
उत्तरप्रदेश
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