जिला - बलौदा बाजार ( छ.ग.)
विधा - छंद मुक्त कविता
विषय - थलाकृति
अलंकार - रूपक अलंकार
शीर्षक - पृथ्वी की शोभा
मानव जीवन के बीज पनपते ,
सात बड़े महाद्वीप ।
पृथ्वी की शोभा संसाधन ,
ये थलाकृति अनेक ।।
वनौषधि वृक्षों से भरा ,
वन सम्पदा हमारी ।
पर्यावरण की रक्षा में ,
योगदान अति भारी ।।
अमृत जल से व्याप्त है ,
नदी नाले लबालब ।
जलप्रपात झरना और झील ,
पर्यटन उद्योग के आकर्षक ।।
पर्वत घाटी पठार भी ,
लोगों को ललचाते ।
अदम्य साहसी पर्वतारोही ,
गिरते संभलते चढ़ जाते ।।
धूल भरी आँधी चलती है ,
वर्षा तरु जन शून्य स्थान ।
थार सहारा कालाहारी ,
ऐसे भयानक रेगिस्तान ।।
विविध भौगोलिक स्थलाकृति ,
प्रकृति का श्रृंगार है ।
यह अमूल्य धरती धन अपना ,
ईश्वर प्रदत्त भण्डार है ।।
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