Tuesday, August 11, 2020

कोरबा से गोमती सिंह की रचना- पार्थ

रचनाकार का नाम गोमती सिंह 
जिला -कोरबा छत्तीसगढ़ 
विधा - छंद मुक्त कविता 
अलंकार:- उपमा 
शीर्षक--चाहत पार्थ बनने की 


प्रस्तुत है कविता--


आज जन्माष्टमी का है पर्व निराला ।
जग को आनंद विभोर करने वाला । 
कहाँ से ऐसी शब्दावली लाऊं, 
देवकीनन्दन के कैसे गुण गाऊँ ।
जो सृष्टि के कण -कण को बांधें,
कैसे उन्हें निज प्रेम पाश में बांधूं । 
उनके राजीवलोचन में 
कैसे कृपा पात्र बनूं मैं 
अपनी व्याकुलता कैसे बताऊँ,
कैसै उनके करकमलों का आशीष अपने सिर पर पाऊँ । 
अश्रु मेरे आँखों में है आने लगे,
जब वो कलम में समाने लगे ।
हे केशव ! कर्म करूँ पर फल ना चाहूँ! 
मुझको भी इसका मर्म बता दो, 
चलना चाहूँ राहों में तेरी,  
मुझको भी तो पार्थ बना लो ।
मुझको भी तो पार्थ बना लो । 
          गोमती सिंह, कोरबा छत्तीसगढ़
ब्याख्या--रचनाकार श्री कृष्ण जी के जन्माष्टमी पर्व पर आनंद विभोर होते हुए  खुद को अर्जुन जैसे भक्त बनाने की कामना कर रही है । 
        गोमती सिंह 
       कोरबा छत्तीसगढ़

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