Tuesday, August 11, 2020

महासमुन्द से विनोद कुमार "जोगी" की रचना- मोहन

रचनाकार :- विनोद कुमार "जोगी"
जिला :- महासमुंद
विधा :- छंद मुक्त कविता
विषय :- जन्माष्टमी
अलंकार :- उपमा अलंकार
शीर्षक :- मोहन रूप

#######################

देवकी के गोदी में,
खिला आज एक शिशु सुमन सा।
नयन कजरारे लग रहे हैं,
चमकिले मृग लोचन सा।
पट पहने हैं पीत रंग का,
माथ में सोहे मोर पंख है।
चमकते सूरज में नीले बादल सा,
श्यामसुंदर का श्याम रंग है।
तान जो छेड़े मधुर वह,
बंशी की धुन की दुनिया दीवानी।
झूम जाते हैं जिसको सुनकर,
सकल गोपियों संग राधा रानी।
मुख खिला है सूरजमुखी सा,
गालों में सिंदूरी लाली।
काली घटा सी बिखरी है,
केश काली घुंघराली।
आने से तीनों लोकों में,
होने लगी फूलों का वर्षण।
हरि के मोहन रूप का,
फैला जग में आकर्षण।

#######################

व्याख्या :- उपरोक्त पंक्तियों में रचनाकार ने श्री कृष्ण के मनमोहक व्यक्तित्व को अपने शब्दों में पिरोने का प्रयास किया है।
काव्य अलंकरण के लिए रचनाकार ने उपमा अलंकार का प्रयोग करने का प्रयास किया है।

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...