संबलपुर,जिला-कांकेर
विषय :- *स्वदेशी*
अनन्वय अलंकार का प्रयोग
भारत का स्वर्णिम इतिहास
बता रहा सुंदर रूप साकार,
हर दृष्टि से संपन्न रहा देश
हमारा स्वदेशी था आधार।
लुटेरों,उपनिवेशवाद,
पश्चात्यवाद,ये तीनों
स्वर्णिम देश के है विकार ।
इसकी कहीं कोई नहीं सानी,
जग में भारत जैसा
दूसरा भारत की नहीं कहानी।
आज के दौर में
अस्तित्व पर छाया है अंधेरा,
कल कारखानों ने
अर्थव्यवस्था है डगमगाया।
कोरोना है कोरोना इसके जैसे
कोई नहीं महामारी,
मुश्किल में है जग का इंसा,
छायी बड़ी लाचारी।
अब अपनी प्राचीन गाथा
अपनानी होगी,
आत्म निर्भर भारत की
ताकत दिखलानी होगी।
प्रखर, प्रचंड हौसलों से
आगे बढ़कर,
अपनी सोई शक्ति
जगानी होगी।
दूसरों के भरोसे
नहीं है रहना,
चीन,जापान सबसे
आगे है बढ़ना।
स्वदेशी अपना
आर्यावर्त को,
विश्व गुरु आर्यावर्त
जैसा फिर बनाना है।
*अनन्वय अलंकार का प्रयोग* :-
1.भारत जैसा भारत
2.कोरोना है कोरोना जैसा
3.आर्यावर्त को आर्यावर्त जैसा।
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर,(छ.ग.)
No comments:
Post a Comment