Wednesday, August 12, 2020

रायगढ़ से पुष्पा पटनायक की रचना- स्वदेशी

रचयिता- पुष्पा पटनायक 
स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़ 
शीर्षक -"स्वदेशी"(अनन्वय अलंकार)
विधा- छंदमुक्त कविता
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भारतीय ,भारतीय सा महान
हर कोई ऐसा ही जान
गवाह बरसों से बन रहा 
ऐतिहासिक ,ऐतिहासिक मान

युगांतर युग कहता रहता है
भारत की सभ्यता विशाल
स्वदेशी से स्वदेश बचेगा
भारत का होगा नव विहान

बात परदेश, परदेशी की नहीं
और न किसी समान की है
बात संस्कृति की सुदृढ़ता और
अपनत्व के मान सम्मान की है

आवाज के साथ हो आगाज
एक पौ निकलनी बाकी है
देश  हित  स्वदेश  हेतु
एक जंग लड़नी अभी बाकी है।

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