Thursday, August 13, 2020

बलौदाबाजार से संतराम कुम्हार की रचना- मित्रता

रचनाकार -  संतराम कुम्हार 
   जिला -  बलौदाबाजार (छ. ग.) 
   शीर्षक  -  " मित्रता "
     विधा - छंदमुक्त कविता 
अलंकार - असम अलंकार
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प्रेम का अटूट डोर है दोस्ती।
खुशियों का एक शोर है दोस्ती।
रखे ख्याल जो हरदम हमारा।
रंगों से सजी खूबसूरत मोर है दोस्ती।। 

मित्र! तुझ-सा कोई मित्र नहीं, 
तुझमें ही बसी मेरी जान है। 
हर जनम में तेरी दोस्ती का साथ हो, 
मेरा इतना-सा बस अरमान है।।

दिल से दिल का मिलान है दोस्ती। 
जिंदगी की हमारी शान है दोस्ती।
रोते को भी जो हंसना सिखा दे, 
जानेमन जानेजिगर जान है दोस्ती।। 

मित्रता की तेरी मैं क्या मिशाल दूँ, 
जैसे कृष्ण और सुदामा। 
प्रभु धो चरण वंदन किये, 
फिर बाहों में अपने थामा।।

सब रिश्तों से खास है दोस्ती। 
त्याग का एक अहसास है दोस्ती। 
जिंदगी में जो प्रेमरस घोल दे, 
ऐसी ही एक मिठास है दोस्ती।। 

वादों का जो पक्का होता है, 
हर हाल में फर्ज निभाता है। 
राम-सुग्रीव सम कोई नहीं, 
एक राज पाट वापस दिलाता है तो, 
दूजा माँ सीता खोज लाता है।।

मुसीबत में सबके मददगार है दोस्ती। 
रेगिस्तान में भी हरियाली की बहार है दोस्ती। 
पूरी करते जो हर जरूरत हमारी, 
सपने में ही हकीकत का दीदार है दोस्ती।। 

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 असम अलंकार का प्रयोग :-
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1. मित्र! मित्र-सा कोई नहीं 
2. राम-सुग्रीव सम कोई नहीं 

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