जिला - बलौदा बाजार( छ. ग.)
विषय - मित्रता (असम अलंकार )
विधा - छंद मुक्त कविता
शीर्षक - मित्रता
जीवन के हर मोड़ पर ,
कभी न जाये छोड़कर ,
औपचारिकता तोड़कर ।
बेझिझक जो गले मिले ,
धन्य वही है मित्रता......
सुख-दुख में जो साथ रहे ,
खरी-खरी जो बात कहे ,
आपस की गलतियाँ सहे ।
ऐसे मित्र-सा मित्र नहीं ,
धन्य वही है मित्रता......
प्रेम और गहरा विश्वास ,
खूब चले मस्ती - मजाक ,
कपट-झूठ का नही खुराक ।
जीवन भर का हो व्यवहार ,
धन्य वही है मित्रता......
ऊँच-नीच का भाव नहीं ,
पद-पैसे का प्रभाव नही ,
तुच्छ स्वार्थ की चाह नहीं ।
कृष्ण-सुदामा जैसे संबंध,
धन्य वही है मित्रता......
जब मिलते हैं मन-हृदय ,
सच्ची मित्रता का उदय ,
नहीं विषमता और संशय ।
दोनों में केवल समभाव ,
धन्य वही है मित्रता......
बचपन के जो मित्र हैं ,
सहपाठी चिरपरिचित हैं ,
आते मधुर याद नित हैं ।
बालमित्र-सा मित्र नहीं ,
धन्य वही है मित्रता.....
जग में दुर्लभ सच्चा मीत ,
कौन करेगा असली हित ?
मतलब के सब गाते गीत ।
सच्चे मित्र का संग मिले तो ,
धन्य वही है मित्रता.......
परम मित्र सबके भगवान ,
सत्य प्रेम करुणा निधान ,
जीवों का करते कल्याण ।
प्रभु प्रेम - सा प्रेम नहीं ,
धन्य वही है मित्रता......
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