जिला-महासमुन्द, छत्तीसगढ़
शीर्षक;"मर्यादा पुरुषोत्तम"
विधा-कविता(तुकांत)
अलंकार- श्लेष अलंकार
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रघु कुलभूषण नाम है,जीवन जीने की रीत।
अपनों के स्वार्थ में भी, दिखाई अपनी प्रीत।।
प्रजाप्रिय न्यायप्रिय वह,राम हर हृदय बसे।
अर्द्धांगिनी सियापति के,चरण नहीं उर बसे।।
रामायण कलियुग आधारा,मिलता आत्मबल।
सहज सरल जीवन बीता,रखा दूर कपट छल।।
आचरित गृहस्थ जीवन, मर्यादा पुरुषोत्तम राम।
आज्ञापालक मान बड़ों को, नमते सुबह शाम।।
संतोष राम ही शबरी के,तरसे करने को दर्शन।
उम्र गुजारी उम्मीदों में,तब पाया सुख अंतर्मन।।
हिन्दगौरव मंदिर का आज हुआ है शिलान्यास।
पाँच सौ वर्ष से आकुल मन में जागा विश्वास।।
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कुलभूषण=पुत्र,वंशज।
प्रजाप्रिय=राम,प्रजाओं का प्रिय।
रामदर्शन=संतोष,दर्शन।
मर्यादा पुरुषोत्तम=संयमित आचरण, पुरूषों में उत्तम।
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