*रचनाकार-एच-एस-अरमो"अरमान "
निवास:-बैरन-बाज़ार,रायपुर ।
जिला--रायपुर ,छत्तीसगढ़ ।
विधा-छ्न्द-मुक्त ,कविता (विप्सा
अलंकार)
शीर्षक-- "" सफाई "" ।
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{•}<>●••|||•सफाई |||•••●<>{•}
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मेरा भारत महान् ---
और उसके,गाँव की,बोलती जुबानी,
गाँव तरस रहा, पानी-पानी,
सूखे,ताल-तलैया व नदी-नाले ,
कमलदल-सूखे- - -
व्याकुल हुये,पशु -पक्षी सारे ,
हुयी,गाँव में,बीमारी,लाचारी व बेकारी,
गाँव से,होने लगी,लोगों की,भारी
"सफाई " ।01।
जब गाँवों में, पानी-पानी हुआ,
गाँवों में,गन्दगी का,सैलाब हुआ,
फसलों का भी,भरपूर नुकसान हुआ,
फिर,कहीं भी,दिखी नहीं "सफाई "
और गाँव का,बुरा हाल हुआ ।02।
जब गाँवों में---
पानी की,सुविधाएँ आसान हुयी ,
कुँए बने ,नलकूप भी खुदे ---
लगे,हर गाँव व मुहल्ले--मुहल्ले,
उसकी सुविधाएँ तो उठाये,
गाँवों में सबने भरपूर ।
महिलाओं की- --
पानी भरने की,हुयी परेशानी दूर,
उनके काम का बोझ भी,
हुआ हल्काऔर सुखचैन मिला भरपूर,
पर,किसी ने भी, दिल से---
कुँए,नलकूप व नाली की,
"सफाई" का नाम न लिया ।03।
पहली-पहली बार,बरसात में,
जब मैं अपने गाँव गया घूमने,
गन्दगी,कूड़े के ढेर व खाद के गड्ढों ने ,
अपनी,तीखी-तेज बदबूदार गंद से,
मेरा, पुरज़ोर स्वागत-सत्कार किया ।
गाँवों में,इस मौसम में---
फैली महामारी,हैजा व मलेरिया की,
सुविधाएँ न थी,उनके ईलाज की,
शिक्षा की अभी भी,देखी मैंने कमी।4।
आओ,हम-सब मिलकर,करें "सफाई"
ऐसा सुव्यवस्थित पक्का हल निकाले,
स्वास्थ्य व शिक्षा की जनचेतना जगावे
ताकि,गाँव की"सफाई"के साथ-साथ में
हो ,उनके तन-मन की भी, "सफाई"
तभी ला पायेगें उनके---
इरादों और विश्वासों में,स्थाई"सफाई"
।05।
"राष्ट्रीय स्वच्छता अभियान"हो सफल।
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व्याख्या:--उपरोक्त रचना के माध्यम से यह कहना चाहता हूँ कि "सफाई"का प्रयोग विभिन्न आयामों में किया गया है ।
**स्वरचित प्रस्तुति-एच-एस-अरमो
"अरमान "
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