जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़)
विषय:- *जीवन के पड़ाव*
शीर्षक:- जीवन
अलंकार:- उल्लेखादि अलंकार
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तुम प्रीत हो मनमीत हो,
तुम ही मेरी गीत हो संगीत हो ।
तुम ही भविष्य मेरा अतीत हो,
तुम ही विनीत हो नवनीत हो ।।
तुम प्रतीत कोई सत्यजीत हो,
दुखों से दुखातीत ग्राम-गीत हो ।
तुम अजीत हो सर्व गृहीत हो,
तुम ही अभीत वही अमित हो ।।
तुम प्रेम प्रणीत जगजीत हो,
तुम हार-जीत से परे विस्तृत हो ।
नित्य निश्चित तुम ही निष्क्रीत हो,
तुम ही पुनीत मौसमों में शीत हो ।।
मन के मनोनीत तुम अनुनीत हो,
शुद्ध स्वधीत तुम संस्कार यज्ञोपवीत हो ।
तुम ही सुजीत प्रमीत हो,
प्रवाह विपरीत तुम ही परिणीति हो ।।
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स्वरचित मौलिक रचना:-
गुलशन खम्हारी "प्रद्युम्न"
रायगढ़ (छत्तीसगढ़
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