पता____ कसडोल
शीर्षक -- जीवन का सार
विधा ---- कविता ( गीत )
________________________________________
हर घड़ी , हर पल मुस्कुराता चल !
गीत खुशी के हरदम गाता चल !
अगर रोता हुआ राह में दिखे कोई ,
जरा - सा उन्हें गुदगुदाता चल !
ये जीवन है क्षण भर का ,
जी ले तू मन भर का !
ये काया है क्षणभंगुर रे पगले ,
मत कर घमण्ड कण भर का !
ये रहस्य सबको बताता चल ! !
हर घड़ी ............................
न कोई अपना , न कोई पराया है ,
सब तुझमें , तू सबमें समाया है !
मोह के पीछे मत भाग रे बन्दे ,
ये तो सब प्रभु की माया है !
प्रभु की महिमा तू सुनाता चल !!
हर घड़ी ................... .........
क्षीण - सा हिस्सा है तू इक बीज का ,
मत कर अहंकार तू अपने चीज का !
जब तक है तू इस दुनिया में ,
कर ले सेवा दीन और मरीज का !
भूखे को भोजन तू खिलाता चल !!
हर घड़ी ..................................
मर मर कर तू कितना कमाएगा ,
अंत में कुछ काम न आएगा !
खाली हाथ आया है रे मानव ,
संग तेरे कुछ न जाएगा !!
सत्कर्म कर , दुआएं कमाता चल !
हर घड़ी .............................
उम्र घटता जाए क्षण क्षण में ,
चला आ तू प्रभु की शरण में !
ढूंढता कहां है तू भगवान को ,
राम समाया है कण कण में !!
राम भजन तू सुनाता चल !
हर घड़ी...........................
_______________________________________
No comments:
Post a Comment