Monday, August 31, 2020

कसडोल से चेतन सिंह क्षत्रिय की रचना- जीवन

रचयिता _ चेतन सिंह क्षत्रिय
पता____ कसडोल
शीर्षक -- जीवन का सार
विधा ---- कविता ( गीत )
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हर घड़ी , हर पल मुस्कुराता चल !
गीत  खुशी के  हरदम  गाता चल !
अगर रोता हुआ राह में दिखे कोई ,
जरा - सा  उन्हें   गुदगुदाता  चल  !

ये    जीवन    है  क्षण भर का ,
जी    ले   तू     मन   भर का !
ये काया है क्षणभंगुर रे पगले ,
मत  कर घमण्ड कण भर का !
ये  रहस्य सबको बताता चल ! !
हर घड़ी ............................

न कोई अपना , न कोई पराया है ,
सब  तुझमें ,  तू सबमें समाया है !
मोह  के  पीछे  मत भाग रे  बन्दे , 
ये   तो  सब  प्रभु  की  माया  है !
प्रभु की  महिमा तू सुनाता चल !!
हर घड़ी ................... ‌‌‌‌.........

क्षीण - सा हिस्सा है तू इक बीज का ,
मत कर अहंकार तू अपने चीज का !
जब    तक  है   तू  इस  दुनिया  में , 
कर  ले  सेवा  दीन  और मरीज का ! 
भूखे   को भोजन तू खिलाता चल !!
हर घड़ी ..................................

मर मर   कर तू कितना कमाएगा ,
अंत   में  कुछ   काम न आएगा !
खाली  हाथ   आया  है रे मानव , 
संग  तेरे      कुछ   न    जाएगा !!
सत्कर्म कर , दुआएं कमाता चल !
हर घड़ी .............................

उम्र   घटता  जाए क्षण क्षण में ,
चला   आ तू प्रभु की शरण में !
ढूंढता  कहां है तू भगवान को ,
राम   समाया है कण कण में !!
राम   भजन  तू  सुनाता चल !
हर घड़ी...........................
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