Tuesday, August 25, 2020

कांकेर से मीरा आर्ची चौहान की रचना- मन एक दर्पण

रचनाकार-मीरा आर्ची चौहान
जिला-कांकेर,छग
शीर्षक- मन एक दर्पण
अलंकार-दीपक अलंकार
विधा-कविता ( मुक्त छंद)
  
मन एक दर्पण
 मन ही देवता
मन की गति
न जाने कोय।

मन की अशांति
मन का  वो भ्रम
दुनिया में पहचाने
भला  और कौन।

मन से ये मनवा 
सैर करे जग का
बिन मेहनत करे
पेट भरे कौन।

जग में मन बैरी 
भ्रमित होत है,
मन को मनवा
 समझावै कौन।।

मीरा आर्ची चौहान
कांकेर,छग
________________________
दीपक अलंकार-
1-मन से मनवा सैर करे जग का।
  बिन मेहनत करे पेट भरे कौन।।
2-जग में मन बैरी भ्रमित होत है,
   मन को मनवा समझावै कौन।।
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