रचनाकार _सावित्री यादव "सावि "
बिलासपुर छ. ग.
शीर्षक -कृष्ण - कन्हैया
सुनो कान्हा विनती मोर |
शरण आई तोर |
राधा के श्याम तुम |
मीरा के मोहन तुम |
शरण आई तोर |
मोहनी छवि तुम्हारी |
हे गिरधर नगर |
हे पालनहार |
शरण आई तोर |
तुम हो जगत के नाथ |
तेरे होते हम नहीं है अनाथ |
शरण आई तोर |
देवकी के लाल |
गोकुल में यशोदा के गोपाल |
शरण आई तोर |
सुन भक्तो की पुकार |
तुरंत लिये अवतार |
शरण आई तोर |
कमल नयन तुम |
गिरधर हो तुम और
श्याम रंग वाले घनश्याम |
शरण आई तोर |
मन को मोहित करने वाले |
तुम हो मन मोहना |
शरण आई तोर |
सबके दुख हरने वाले |
मुरली बजा मोर पँख वाले |
शरण आई तोर |
ऐसे कृष्ण भगवान |
भक्तो का करते कल्याण |
शरण आई तोर |
करो मुझे पर उपकार |
करो मेरा उद्धार |
शरण आई तोर |
कमल नयन
घनश्याम में उपमा अलंकार का प्रयोग
रचनाकार _ सावित्री यादव "सावि "
बिलासपुर छ. ग.
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