Wednesday, August 26, 2020

महासमुन्द से द्रोपती साहू "सरसिज" की रचना- स्वर्ग सुख

कवयित्री-द्रोपती साहू "सरसिज"
जिला-महासमुन्द, छत्तीसगढ़।
शीर्षक:"स्वर्ग सुख"
विधा-कविता(तुकांत)
अलंकार-रूपक अलंकार

              *****
ऊँची-ऊँची पहाड़ियाँ,कहीं समतल आकृति।
अमृतजल प्राणवायु,बाँटे है हर कहीं प्रकृति।।

रूकता नही वर्षाजल,फिसलपट्टी ढाल में।
नदी पेड़ पर्वत फसलें,सजते एक थाल में।।

मदहोश होकर हवाएँ, छूती हैं धरा का बदन।
कोना-कोना धरती का, बना सबका इंद्रसदन।।

पखेरू भरे उड़ान ऊँची,नभ में पवनचाल में।
दाना चूगने विश्रांति को,उतरे धरा हरहाल में।।

मौसम करवटें बदलकर,आता नये जोश में।
वसुधा के वासिंदे पाते, स्वर्गसुख आगोश में।।
                

1 comment:

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...