Friday, August 14, 2020

कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- शत बार नमन है

रचनाकार-नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,जिला-कांकेर
  शीर्षक- *शत बार नमन है*
   विषय :- आजादी
 
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   *शत बार नमन है*

अनगिनत,अनाम शहीदों 
तुम्हें शतबार नमन है,
जीते जी जिन्होंने हँसते हुए 
मृत्य का किया वरण है।

आजादी के मतवाले,
वतन के रखवाले।
माँ भारती की जंजीरें तोड़ने 
तुम्हारे बढ़े कदम थे।

कितनों ने बेटे खोए,
कितनों से रूठी राखी।
कितनों की सिंदूर,चूड़ियां 
छूटी, कितने अनाथ हुए 
जिसकी नहीं साखी।

कितने संघर्षों के बाद हुआ 
आजादी से है वरण ।
इतनी बेशकीमती आजादी को 
डूबाने क्यों बढ़े तुम्हारे है चरण।

आने शहीदों का नेतृत्व,
देशभक्तों का व्यक्तित्व,
रणबाँकुरों का करे मान,
बलिदानों में छुपा जिसका अस्तित्व।

जिनके दम पर 
गुलिस्तां बना है ये चमन,
नव विचार नव सपन ले बढ़े 
आजादी का हो ना हरण है।

अनगिनत,अनाम शहीदों 
तुम्हें शत बार नमन है,
जीते जी जिन्होंने हँसते हुए 
मृत्य का किया वरण है।


*व्याख्या*-प्रस्तुत कविता में शहीदों के त्याग समर्पण के बल और आजादी मिली है,इसलिए उन्हें शत बार नमन किया गया है।
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     नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर(,छ. ग.)

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