रायगढ़, छत्तीसगढ़
विषय-स्वतंत्रता दिवस
विधा-छंद मुक्त कविता
आजादी का पर्व ये
देश का गौरव गान है
सैंकड़ों बलिदान देकर
मिला ये सम्मान है।
पर आज भी हम
अंग्रेजी का गुलाम हैं
पश्चिम सभ्यता को अपनाना
निज संस्कृति का अपमान है
क्या सचमुच हम आजाद हैं?
बेटियों की आबरू रोज
लुटती सरेआम है
अपराधियों को बचाना
नेताओं का काम है
भुखमरी, बेकारी और
महंगाई के ही राज है
क्या सचमुच हम आजाद हैं?
चीनी सामानों का बाजार गर्म है
हम विदेशी मानसिकता के गुलाम हैं
देश की गिरती अर्थव्यवस्था का
हम खुद ही जिम्मेदार हैं
जाति-धर्म के भेदभाव से
हम आज भी बर्बाद हैं
क्या सचमुच हम आजाद हैं?
राम,रफाल और गलवान की
जीत का ये जश्न है
स्वाधीनता के इस पर्व पे
उठता एक ही प्रश्न है
क्या सचमुच हम आजाद हैं?
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