Tuesday, August 4, 2020

बिलासपुर से सावित्री यादव "सावि " की रचना- गुमराह

        रचनाकार -सावित्री यादव "सावि "
        बिलासपुर  छ. ग.
        विषय _ गुमराह 

 शीर्षक _ गुमराह 

गुमराह होता हर इंसान अपनी ही इछाओ  के कारण 
और ना इच्छा  पूरी होती है और ना होता उसका निदान 

आपस में उलझा रखता है| हर बात को ख्वाब  को |
और सोना भी चाहिए |और सोना भी चाहिए |
पर मिलता नहीं चैन मन को |

क्यों भटकाता  है | पागल मन को |
ये बहकता  भी है बहकता  भी है | इंसान को |

प्यासा मन है | प्यासी आस है|फिर भी है विश्वास |
कभी तो पूरी होंगी मन की हर इच्छा  जो है खास |

ना खुद को समझाता है | ना खुद को बहलाता है |
ये चंचल मन है | खुद को गुमराह करता है |

गुम हो जाता है | राह  में और  मंजिल पाना चाहता है |
ये मन ही है | जो मन भर पूरी कायनात में घुम  आता है |

भावर्थ _ मन के भटकाव का वर्णन 


No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...