जिले का नाम:- मुंगेली(छत्तीसगढ़)
शीर्षक:- राम लला
विधा:- छंद मुक्त, श्लेष अलंकार
राम लला निज धाम से,
शंखनाद जय कार हुआ।
अवधपुरी की गुँज से,
भावभोर संसार हुआ।।
जय हो जय जय राम तुम्हारे,
दशरथ नंदन राम दुलारे।
कृपा आज बरसायो रामा,
कब से थे हम तुम्हे पुकारे।।
बाट निहारे ताक रहे थे,
अब तो नइया पार हुआ।
राम लला निज......कार हुआ।।
धरा ये कब से पूछ रही थी,
अयोध्या निज धाम की।
कब पड़ेंगे चरण कमल पद,
प्रभु श्री मेरे राम की।।
धन्य धन्य हो राम तुम्हारे,
हम पर कृपा अपार हुआ।
राम लला निज......कार हुआ।।
राम मिलत सब भाव में,
जो कर चले सो मोल।
मूरत मिले धन दौलत से,
श्री राम मिले मिठ बोल।।
अपनी आँख से देख लो भाई,
उसी का ये सत्कार हुआ।
राम लला निज......कार हुआ।।
सबकी मुख ये बोल रहा है,
रम गये सब झने राम में।
चलो बसाने नये नगर,
अयोध्या निज धाम में।।
देखो आज मेरे राम की,
पुनः फिर अवतार हुआ।
राम लला निज......कार हुआ।।
नागेश कश्यप।।
श्लेष अलंकार
1. जय कार
जयकारा लगाना, विजयी होना।
2. भाव
मूल्य, अंतर्मन की भाव।
बहुत सुन्दर वाह्ह्ह्ह्ह् नागेश
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