पता - पेंडरवानी , बालोद , छ. ग.
शीर्षक - वो याद आती है
छंद - मुक्त छंद
वो याद आती है
किसी के चले जाने पर ,
लौट न आने पर ,
कसक दिल में उठती है ,
कि वो याद आती है ,
जीवन के उलझन में ,
किसी से फिर अनबन में ,
रहक सी उठती है तन -मन में ,
कि वो याद आती है ,
डाँटता कोई अपनों को
अधिकार जताते जब ,
अपनेपन से और कोई
ढांढस बंधाते जब ,
फटकार के फिर प्यार से
गले लगाते जब ,
कि वो याद आती है ,
कोई खुद से ज्यादा मान ,
कोई और को देता है ,
औरों की गलती कोई ,
जब खुद ले लेता है ,
दिल रोता है मेरा
कि वो याद आती है ,
किसी के न होने पर भी ,
उसका एहसास सा लगे ,
मुलाकात नामालूम हो ,
पर आस - पास सा लगे ,
तब कहने की जरूरत नहीं ,
कि वो याद आती है ,
- - शैलेन्द्र चेलक - -
Superb sir jii
ReplyDeleteBrilliant 👌👌👌👌