Monday, August 17, 2020

बालोद से शैलेन्द्र चेलक की रचना- वो याद आती है

रचनाकार - शैलेन्द्र चेलक
पता - पेंडरवानी , बालोद , छ. ग.
शीर्षक - वो याद आती है
छंद - मुक्त छंद

             वो याद आती है

 किसी के चले जाने पर ,
लौट न आने पर ,
कसक दिल में उठती है ,
कि वो याद आती है ,

जीवन के उलझन में ,
किसी से फिर अनबन में ,
रहक सी उठती है तन -मन में ,
कि वो याद आती है ,

डाँटता कोई अपनों को 
अधिकार जताते जब ,
अपनेपन से और कोई 
ढांढस बंधाते जब ,
फटकार के फिर प्यार से 
गले लगाते जब ,
कि वो याद आती है ,

कोई खुद से ज्यादा मान ,
कोई और को देता है ,
औरों की गलती कोई ,
जब खुद ले लेता है ,
दिल रोता है मेरा 
कि वो याद आती है ,

किसी के न होने पर भी ,
उसका एहसास सा लगे ,
मुलाकात नामालूम हो ,
पर आस - पास सा लगे ,
तब कहने की जरूरत नहीं ,
कि वो याद आती है ,


           - - शैलेन्द्र चेलक  - -

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