संबलपुर,जिला- कांकेर
शीर्षक-श्री राम
विधा- छंदमुक्त
~~~~~~~~~~~~~ *श्री राम*
दशरथ नन्दन रघुवर को
मिला अपना स्थान,
राममंदिर का हुआ
शिलान्यास ससम्मान।
उषा संग सुनहरे भोर
का आना हुआ,
घर-घर दीपों की
अवलि से श्रृंगार हुआ।
पाँच सौ सालों बाद
अवध में प्रतिष्ठित हुएं राम,
अवध नगरी बन गई
शोभा संग पावन धाम।
हर्षित हुए भारतवासी
घर-घर बज उठे शहनाई,
राम की धरा हुई आलोकित
सबको हो बधाई।
रामराज्य की कल्पना
बरसों बाद होगी साकार,
त्याग,तपस्या और कुर्बानी से
मिला अनुपम उपहार।
केंवट,सुग्रीव, जटायु,
शबरी सबके तारणहार,
अमर हो उठा इतिहास आर्यावर्त का,
पा तुम जैसे पालनहार।
अवध का वैभव कनक
महल था रत्नों से भरा,
रोती सुबकती धरा पूछती
लाल कहाँ मेरा खरा।
मर्यादा पुरुषोत्तम सिया के
राम तुम्हें बारम्बार प्रणाम,
राम राज्य की कल्पना से
प्रमुदित जनता हुई निहाल।
दशरथ नन्दन रघुवर को
मिला अपना स्थान,
राम राज्य का शिलान्यास
हुआ ससम्मान।
*व्याख्या* :- प्रस्तुत कविता में राम की
महिमा,मंदिर का शिलान्यास
से हर्षित भारतवासी तथा राम
की महिमा गाई गई है।
श्लेष अलंकार का प्रयोग-
1.तारणहार :-
. 1.तारने वाला
2.भगवान
2.पालनहार :-
1.पालने वाला
2.ईश्वर
3. सुमन:-
1.सुंदर मन
2.पुष्प
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, कांकेर,(छ .ग.)
No comments:
Post a Comment