पता - पेंडरवानी , बालोद , छत्तीसगढ़
विधा - मुक्तक(कवित्त छंद)
शीर्षक - अवध में राम
अवध में राम
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( १ )
सजी है अवधपुरी ,मिलन में नही दूरी,
भक्त - भगवान एक साथ ही पधारें हैं ।
वर्षो का वनवास आज पूरा कर आये जो ,
अवध में ही जन्में , अवध के दुलारे हैं ।
छलक उठे करुणा , छलक उठी सरयू ,
छलके जन -जन के नयन ज्यों तारे हैं ।
कोई कहे मेरा है राम , कोई कहे मेरा है ,
अवध आज विराजे जो जग से न्यारे हैं ।
( २ )
छाए घनश्याम जग छाए ज्यों आकाश ही में ,
संतप्त जग-जन को न और तरसायेंगे ।
अधीर चराचर है , अधीर भक्तन पर ,
धीरता के वीर ही अमृत बरसायेंगे ।
विरह वियोग से जल रही धरती पर ,
शीतलता घनश्याम छा ही जायेंगे ।
दीनबंधु , कृपासिंधु ,मर्यादा स्वरूप है जो,
आज हर जन को कृपा कर हर्षायेंगे ।
( ३ )
हर्ष है , उमंग है , चारों ओर राम रंग है ,
दीप रूपी खुशियां बिखरी द्वार - द्वार है ।
कभी लगे समर जीत आये राम - लक्ष्मण ,
अवध सजे मानो ज्यों दीपों का त्यौहार है ।
धैर्य , त्याग , शील का अनुपम उदाहरण ,
राज करने आए वो फिर एक बार है ।
चारों ओर गोठ बात वैसे ही चहल- पहल ,
ज्यों आज ही अवध में जन्में भाई चार है ।
- - शैलेन्द्र चेलक - -
जय श्रीराम 👏👏
ReplyDeleteJay jay shri ram 🙏🙏🙏🙏🌺🌼🌺🙏🌺🌺🌸🙏🌺🌼🌺
ReplyDeleteJai shree ram
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