जिला/राज्य का नाम-अकलतरा, जांजगीर चम्पा
कवि का नाम- रूपेश देवांगन
कविता -
एक नन्ही परी इस दुनीयाँ में जब आई थी
माँ की गोद औऱ उनके आंगन में मुस्कुराई थी
औऱ जब उसने चलना सीखा
तो
पायल की आवाज सबको भायी थी
उसके कंगन की खनक ने एक नयी ध्वनी फैलाई थी
छोटी होने पर लोग प्यार उसपर लुटाते हैं
बड़ी होने के बाद उसे फिर लोग क्यो सताते है
गली, मोहल्ले ओऱ चौराहो में क्यो इनको छेड़ जाते हैं
सुरक्षा इनकी कहाँ गयीं क्यो सब इनको रुलाते हैं
दुपट्टे में लगा दाग देखकर लोग मज़ाक बनाते हैं
अपनी तकलीफ वो जानती हैं
तो क्यो लोग इन्हें तड़पाते हैं
हवस अपनी पुरी करके लोग जान भी,
उसकी ले जाते हैं
और जिंदा रहकर भी वो मर जाती हैं
क्योकि लोग ताने बहुत सुनाते हैं
उस पारी का क्या कसूर हैं
जो लोग उसपर बौखलाते हैं
नियत तो लोगो की खराब हैं
जो अस्मत रोज लुटे जाते हैं
Dil ko chu.. lene wali line hai ye.....
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