लीलाधर कुम्हार
विषय - ग्रामोदय के लिए प्रयास
बिषय क्षेत्र - मुक्त
विधा - छंदमुक्त कविता
अलंकार - वीप्सा अलंकार
शीर्षक - ग्रामोदय
खेती-बाड़ी करनेवाला ,
दूर गाँव मे रहता हूँ ।
मैं कर्मठ मजदूर किसान ,
अभावों मे पलता हूँ ।।
बेरोजगारी - गरीबी मे ,
जकड़ा हूँ मैं रात -दिन ।
कैसे करूँ विकास भला ,
सुविधा-साधन से विहीन ।।
गाँव देश की धड़कन है ,
फिर भी अंधेरी रात ।
आजादी के सत्तर साल ,
आया नहीं प्रभात ।।
शिक्षा की नव ज्योति से ,
हाई स्कूल बन जाये ।
मेरा यही प्रयास है ,
गाँव मेरा मुस्काये ।।
नाले की पुलिया बने ,
पक्की सड़क बन जाये ।
गली-गली में रोशनी ,
सबके मन को भाये ।।
गाँवों में पक्का मकान ,
साफ-सफाई शौचालय ।
शासन की हर योजना ,
जन-जन तक पहुचायें ।।
सबके लिए रोजगार ,
मनोरंजन के साधन ।
सुख-शांति खुशहाली बरसे ,
गाँव गली घर - आँगन ।।
नशा कलह की वेदना ,
रोज-रोज तड़पाये ।
घर - घर मंदिर-सा पावन ,
स्वर्ग तुल्य हो जाये ।।
गाँव-गाँव मे सुराज की ,
गंगा बहती जाये ।
ग्रामोदय की धारणा ,
जन-मन मे समाये ।।
ग्रामोदय के लिए प्रयास ,
मैं करता रहता हूँ।
भारत गाँवों में बसता है ,
सुनता और समझता हूँ ।।
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रचनाकार
लीलाधर कुम्हार
( स्वरचित व मौलिक )
Bahut sunder
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