स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
शीर्षक -"गौरव गाथा"
विधा- छंदमुक्त कविता
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आज सुनाऊं मैं गाथा
आजादी के किस्सों की
दर्द भरी दास्तां सुनाऊँ
इंकलाब के नारों की।
वीर चढ़ा गये शीश अपना
आजादी की बलिवेदी पर
कतरा-कतरा दे दिया अपना
आँच न आने दी माँ भारती पर।
आजादी का सपना लिए
सो गए कफ़न ओढ़ कर
याद करलें उनको जो हो
गए न्यौछावर वतन पर।
आजादी देकर हमें दे दिया
सुख शांति और चैन अमन
और खुद से चुन लिया
हंसते हुए मौत का कफ़न।
एक-एक कर्ज चुकाना है
गौरव- गीत गुनगुनाना है
वीर सिपाही का जिसने
आजादी -मशाल थामा है।
Nice poetry mem ....👌👌👌👌 jai hind jai bharat
ReplyDeleteNice
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