Monday, August 3, 2020

बिलासपुर, छत्तीसगढ़ से कवयित्री मीनाक्षी अवस्थी 'छाया' जी की कविता- छलिया जीवन साथी-पत्नी

मीनाक्षी अवस्थी 'छाया',
जिला- बिलासपुर,छत्तीसगढ़।
विषय.... छलिया जीवन साथी-पत्नी।

 पत्नी का दिल और किसी पर, बेचैनी का आलम है,
बेबस हैं माँ बाप बिलखते बच्चे, व्याकुल बालम हैं।
नजर बचा मोबाइल पकड़े,छुप छुप जाती कोने में,
अस्त व्यस्त घर,नहीं उपस्थिति ,होने या न होने में।
झल्लाहट से भरी हर समय, मुद्राएँ आक्रामक हैं,
कैसे,कोई, बात करे जी, आई किसकी शामत है।
सहमें,सिकुड़े घरवाले सब, घरवाली पर जोर नहीं,
बड़े ओहदे पर बैठी है ,नहीं है वो कमजोर कहीं।
मन चँचल है,कब डिग जाए,किसका,किस पर पता नहीं,
क्षमादान ही महादान है ,भूल जाएँ सब खता यहीं।
युक्ति, बुद्धि से काम करें, अवसर ना रखें शिकायत का,
अनजाने बन आप , करें सब काम उन्हीं के लायक का।
अगर उठाया हाथ,तो जानें, उस दिन पौरुष हार गये,
सहनशीलता की मारी के आगे,दुनिया वार गये।
पक्का जादू समझ के रखिये, सिर्फ प्यार ही अँकुश है,
एक इसी व्यवहार से काबू , इसी खुशामद से खुश है।
आहट ना हो उन्हें, खोजकर कारण उसको दफा करें,
अपना घर हो स्वर्ग से सुँदर ,आप स्वयँ से वफा करें।
पुनरावृत्ति समझ आने पर , जिक्र छेड़ आगाह करें,
स्वयँ में विस्मित, लज्जित हो वह बेशक फिर परवाह करे।
फिर बेचैन प्रेमिका के ,जख्मों का मरहम बनें रहें,
बचा लिया घर 'छाया' अपनी ,देख आइना तने रहें......
        मीनाक्षी अवस्थी 'छाया', बिलासपुर, छत्तीसगढ़।भारत।

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