लेखक - संदीप सिंधवाल
राष्ट्र - पपुआ न्यू गिनी
शीर्षक - जब तू राखी बांधती है
जब तू मेरी कलाई धागा बांधती है।
धागा नहीं तू मुझमें हिम्मत बांधती है।।
अनंत सा प्यार तेरे
दिल में जो समा रखा
बस वही सारा वही
मैंने क्या कमा रखा।
शुभचिंतक सी तू कभी भी डांटती है
डांटती नहीं मुझमें हिम्मत बांधती है।।
मां की पिटाई खा के
तेरे पास ही रोया था
आज समझदारी कहां
बचपन क्या खोया था।
एक टॉफी के टुकड़ों को भी बांटती है
टॉफी नहीं तू दिलों में प्यार बांटती है।।
हर राखी के दिन आऊं
ऐसा मेरा नसीब ही नहीं
दुनियादारी की दौड़ में
वक्त मेरे करीब ही नहीं।
मेरे नाम की राखी तू हर बार संवारती है
धागा नहीं तू मुझमें हिम्मत बांधती है।।
Thank you so much
ReplyDeleteNice
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