रचनाकार-पवन गौतम बमूलिया
राज्य--राजस्थान
शीर्षक/विषय- अवध में फिर से आये राम !!"
*अवध में फिर से आये राम*
अवधपुर फिर से आये राम।।
गिरा अनयन नयन बिनु बाणी,
जन्मभूमि अभिराम ।।
*अवध में फिर से आये राम !*
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ताल तलैया सरयू प्यारी।
झूमे गाये नगरी सारी।
मन्दिर मन्दिर चमक रहे है,
देत बधावन शिव त्रिपुरारी।।
अण्ड पिन्ड ब्रह्मांड सृष्टि में,
गूँजे जय श्री राम।।
*अवध में फिर से आये राम !*
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मानो दसरथ राज करत है
लखन शत्रुघ्न भरत चलत है।
कैकई सुमि,कौशल्या मैया,
राम लला की बाट जरत है।।
ढोल मृदंग शंख झालर से
छम छम छलके शाम ।
*अवध में फिर से आये राम!*
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नगर नगर आह्वान हुआ है।
मन्दिर आलीशान सजा है।
पवनपुत्र ख़ुद न्योता देते,
सकल चराचर व्योम छुआ है।
शिव बजरंगी नृत्य करत है
श्री राम जय जय राम ।
*अवध में फिर से आये राम !*
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हिन्द देश के सब नर नारी।
खुश है आज बजावत तारी।
हिन्दू मुसलमां साथ खड़े है
संशय विहग उड़ावन हारी।
महल अटारन चौबारों से
महके अवधपुर धाम ।
*अवध में फिर से आये राम !*
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रचनाकार---पवन गौतम बमूलिया
पता-अंता जिला बारां (राज)
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