Thursday, August 13, 2020

नरसिंहपुर'मध्यप्रदेश से कवयित्री श्रीमती गायत्री ठाकुर 'सक्षम'जी की कविता-माखन चोर

कवियित्री- श्रीमती गायत्री ठाकुर'सक्षम'
जिला- नरसिंहपुर, मध्यप्रदेश
 शीर्षक -माखन चोर
विधा- गीत
                  *माखन चोर*
 वह है वंशी का बजैया,
 वह है नाग का नथैया,
 नंद बाबा का कन्हैया ,
वह तो माखन का चुरैया ।वह है माखन चोर।

 नित उठ आवे ,धूम मचावे,
हर पल वह तो मोहे सतावे।
 मटकी को धरे फोड़ ।
 वह है माखन का चुरैया। माखन चोर

सारी गौयें उसके वश में ,
सारे ग्वाले उसके बस में ,
सखियों का चितचोर ।
वह है माखन का चुरैया। माखन चोर

 कदम पर बैठ के तंग वो करता,
चीरहरण गोपियों के करता।
मन सबके फिर वह है हरता,
   छेड़ के मुरली तान।
वह माखन का चुरैया।माखन चोर

 भईं दीवानी सारी गौएँ,
 सखियें और ग्वाल बाल।
 उंगली पे सबको अपनी नचाता ,
   नटखट है नंदलाल।
वह है माखन का चुरैया।माखन चोर

 श्रीमती गायत्री ठाकुर "सक्षम"
 नरसिंहपुर ,मध्य प्रदेश

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