Thursday, August 13, 2020

कलकत्ता,पश्चिम बंगाल से कवयित्री चंदा प्रहलादका जी की कविता- जय श्री कृष्ण

कवयित्री- चंदा प्रहलादका
कलकत्ता,पश्चिम बंगाल
शीर्षक- जय श्री कृष्ण 


दर्द देवकी बासुदेव का ,चुभ रहा अंतर प्रखर।
टोकरी में सुला कन्हैया,रात का अंतिम पहर।

उदिप्त चंद्रमा सा तेज मुख,दीप्तमान छवि मोहिनी ,
अधर मंद मुस्कान अवतरित,तल टिका निज कोहनी ।
बना गोकुल धाम पुण्य स्थल,आये नंद द्वार प्रभु,
कमल कोमल सदृश ह्रदय संग, देख अपलक मात प्रभु।
पुलकित ममत्व वात्सल्य रूप,प्रीत सुधि अद्भुत लहर ।
टोकरी में सुला कन्हैया , रात का अंतिम पहर।

दर्शाया ब्रह्मांड कंठ मुख,लीला विशाल रचते ,
सुध बुध खोई मात यशोदा,नैन से नीर बहते ।
एक कृष्ण पर भाव अनेकों, निज माया लपेट ली,
माँ यशोदा गोद में खेले ,उर ममता समेट ली ।
मोर पंख है भाल विराजे ,बाँसुरी चूमे अधर ।
टोकरी में सुला कन्हैया, रात का अंतिम पहर ।

चंदा प्रहलादका

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...