जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़)
विधा-विप्सालंकार का प्रयोग
विषय-ग्रामोदय
शीर्षक- "रामोदय में ग्रामोदय"
**************************
राम आ गए अब तो राम राज्य भी आएगा,
शुद्ध हैं राम अब तो गंदगी पाप न रह पाएगा ।
सूर्यवंश का सूर्य उदित हुआ,
घर-घर हर घर में तनिक प्रकाश तो लाएगा ।।
गली-गली हर गली गूॅंज उठे हैं राम,
सुप्त सोई ज्वाला सी धधक उठे हैं राम ।
पापी पाप से निष्पाप हो जाओ,
कोदण्ड पर प्रत्यंचा चढ़ा चुके हैं राम ।।
अब कण-कण को तुम झाड़ लो,
राम ही मिलेंगे पत्थर-पत्थर उखाड़ लो ।
रघुवर सिय संग दिख जाएंगे,
मन में हों राम तो तुम भी सीना फाड़ लो ।।
भगवा रंग के होली में दीया जरुर जलेगी,
दिव्य हो प्रकाश तो ताड़का भी बेमौत मरेगी ।
ईंट-ईंट हर ईंट कह रहा है,
बननी थी जो मंदिर अब तो बनके रहेगी ।
राम-राम को तुम राम जानो,
राम-रावण में राम को ही अपना मानो ।
अयोध्या ही है वास राम का,
बार-बार न तुम तम्बू तानो ।।
राम यहीं तो खेले खाए कूदे हैं,
कौशल्या के तारे दौड़े भागे-भागे हैं ।
धर्म-कर्म का मर्म जानकर,
आज अवध के भाग्य जागे-जागे हैं ।।
पावन पुनीत राम है और रावण ही पाप है,
सरल सादा जीवन ही राम का जपनी जाप है ।
सब कुछ लूट जाएगा यहॉं,
यही मानवता का मानव माप है ।।
**************************
गुलशन खम्हारी "प्रद्युम्न"
रायगढ़ (छत्तीसगढ़)
No comments:
Post a Comment