संबलपुर,जिला-कांकेर
विषय :- *असम अलंकार का प्रयोग*
प्रेम,त्याग,
मिठास और विश्वास,
जीवन जीने के लिए
यही बड़ी आस।
दुनियाँ के हर रिश्तों से
बढ़कर ये रिश्ता,
उल्फत और त्याग भरा
ये है एहसास।
मित्र से मिलने की खुशी
होती बड़ी है खास,
गर मिलना पाएं तो
तबीयत होती है नाशाद।
निराशा दूर भगाएं,
आस की किरण चमकाएं।
इस जग में मित्र सम मित्र
नहीं जग को ये समझाएं।
संकट में ना घबराएं
गिरते को गले लगाएं,
विपत्ति काल में हिम्मत दे,
दोस्ती की परिभाषा समझाएं।
मैत्री भावों से
भरी धरा हमारी,
इस जैसी और कोई
धरा नहीं जगत में।
सच्चा राह दिखाएं,अंधियारे
को आलोकित कर जाएं,
धन्य हो भाग्य हमारा
सच्चा मित्र पा इठलाएं।
*व्याख्या*-प्रस्तुत कविता में मित्र के
गुणों को बताया गया है।
*असम अलंकार का प्रयोग* :-
1.मित्र सम मित्र नहीं जग में,
2.मैत्री भावों से भरी धरा
जैसी धरा नहीं जगत में।
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नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर (छ.ग.)
बहुत ही सुन्दर कविता दीद्दा।
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