स्थान- दुर्ग(छ.ग.)
विधा-मुक्त ,असम अलंकार का प्रयोग
शीर्षक-
*मित्रता*
मित्रता रिश्ता नहीं,
अनमोल संबंध है,
दो निःस्वार्थ मन का,
खून का भी नहीं ,
ना ही जोड़ा हुआ ,
रिश्तों जैसा इसमें
संस्कार बंधन नहीं,
रीति रिवाज नहीं ।
ना ईर्ष्या ना द्वेष,
आपसी होड़ नहीं,
दिखावा भी नहीं,
बनावटीपन नहीं,
जमीन-जायदाद,
पूँजी से सरोकार
नहीं मित्रता का,
दुर्लभ है मित्र होना,
मुश्किल है ऐसे सभी,
सद्गुणों का होना,
क्योंकि मित्रता तो,
कुछ लेता ही नहीं,
प्रगाढ़ संबंध है,
साथ निभाने का।
सच्चे मित्र दिलाते हैं,
निश्चिंतता का अहसास,
जो हर पल रहते,
सब कुछ देने को,
न्यौछावर करने को तैयार,
सच्चे मित्र जैसा इंसान और
सच्ची मित्रता जैसा संबंध
कोई नहीं हो सकता ।।
...........................................
असम अलंकार
सच्चे मित्र
सच्ची मित्रता जैसा कोई नहीं।
No comments:
Post a Comment