Monday, August 3, 2020

रायगढ़ से पुष्पा पटनायक की रचना- राखी का संदेश

रचयिता- पुष्पा पटनायक 
स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़ 
शीर्षक -"राखी का संदेश"(अनुप्रास अलंकार)
विधा- छंदमुक्त कविता
**********************
अबकी  राखी  ना आ  पाऊंगी 
भैया भूल कर भी भूल न जाना 
भेज  रही   हूं  प्यार   के   धागे 
कलाई  पर  जरूर  सजा लेना।

भाई   के   उजले   माथे   पर 
आज  लगा   न   पाऊं  टिका 
बहन   पराए   देश   बसी   है 
याद का दीपक जरूर जलाना ।

आज तुम तक  पहुंच न सकी 
जल्दी -जल्दी जड़  हो  जाना 
मैं न आ सकूँ तो तुम ही आना
भैया  राखी की  रीत  निभाना ।

मालूम है मुझे मुख मुरझाएगा
वीर मेरेे  तुम  मायुष  न होना
शाम  ढलेंगी और  दिन बीतेंगे
फिर राखी हम  जरूर  मिलेंगे।

*************************
व्याख्या-:  (ससुराल से नहीं आ पा रही बहन छोटे भाई को  राखी भेज कर समझाते  हुए )
(भैया भूल के भी भूल) में अनुप्रास है।
(जल्दी जल्दी जड़ हो जाना )में अनुप्रास है।
(मालूम है मुझे मुख मुरझाएगा)में अनुप्रास है।

1 comment:

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...