स्थान- दुर्ग (छ.ग.)
विधा-मुक्तक
शीर्षक - *जय श्री राम*
हर हिन्दू ग्रंथ देते हैं प्रमाण,
अयोध्या जिनका जन्मस्थान,
दो अक्षर का पुण्य यह नाम,
मर्यादा पुरुषोत्तम जय श्री राम,
जय श्री राम,जय श्री राम ।
राम नाम जाप करे ,हर हिन्दू जुबान,
नाम एक पर ध्येय अनेक-
*सबके राम* --
मृत्यु शैया पर -जय श्री राम,
सुबह की बेला- जय श्री राम,
धर्म उद्घोष पर-जय श्री राम,
हो गलत कर्म तो -हाय राम,
हो विस्मय तो -हाय राम !
जय श्री राम,जय श्री राम ।
भाँति-भाँति सबकी जुबान,
कहें मिथ्या या सत्य कथन ,
पर राम नाम दे शुभ-परिणाम,
सन्मार्ग पर लाता यह नाम,
बस ले लो जुबान से एक ही नाम,
जय श्री राम, जय श्री राम
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श्लेष अलंकार
राम एवं जुबान का अलग अलग उपयोग ।
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