Saturday, August 29, 2020

बलौदाबाजार से लीलाधर कुम्हार की रचना- निंदा

रचनाकर - लीलाधर कुम्हार
जिला - बलौदा बाजार  ( छ. ग. )
विधा - छंद मुक्त कविता
विषय - निंदा 
अलंकार - भ्रांतिमान अलंकार
शीर्षक - निंदा

समय बिताने के लिए , 
निंदा सस्ता साधन है ।
निंदा से सुख उपजत है ,
निंदा तो मनभावन है ।।

निंदा सबको प्रिय है ,
निंदा सबकी आदत ।
निंदा रसीली मिठाई है ,
विकृत मन की लालच ।।

अच्छे भले निर्दोष आदमी ,
दुर्जन पापी लगते हैं ।
भ्रम से उनके बारे में ,
निंदा रस टपकते हैं ।।

दुष्ट चोर बेईमान तो ,
लगते सज्जन साधु ।
निंदा की ऐसी महिमा ,
भ्रम से कोयला काजू ।।

निंदक का सम्मान करो ,
निंदक सच्चे हितैषी ।
दुर्गुण - दोष हटाते निंदक ,
परममित्र पारदर्शी ।।

संत - शास्त्रों के अनुसार ,
परनिंदा महापाप है ।
मन विचार में जहर घोलते ,
कलह बीज का बाप है ।।

सत्य को जाने बिना ,
झूठ का स्वागत करना ।
हल्के मन की भ्रमणा है ,
निंदा में गफलत करना ।।

यदि परिवार समाज में ,
होना पड़े न शर्मिन्दा ।
कान पकड़ कसमें खा लो ,
नहीं करेंगे परनिंदा ।।

          ---#---#---#---

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...