Saturday, August 29, 2020

रायगढ़ से पुष्पा पटनायक की रचना- भ्रामक कोरोना

रचयिता- पुष्पा पटनायक 
स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़ 
विधा- कविता (भ्रांतिमान अलंकार का प्रयोग) 
शीर्षक -"भ्रामक कोरोना"
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जुखाम को कोरोना के लक्षण से
महामारी समझ भ्रांति से 
देख सहम रहा जहान  है
निगल जाएगा कहता नादान है

कोरोना  हो  रहा  नील और
जुखाम  हो  रहा  सील है
देखो  डर  रहा इंसान 
और भ्रष्टता जा रहा लील  

जानकार अनजान बनते हैं
मासूम ठगे और लुटे जाते हैं
ये कौनसा सियासी महकमा है
जो जन भावना से खेल रहें हैं

रैपिड फायर चला-चला कर 
दो दिन रख नेगेटिव बता रहें हैं
झांसे  में लेकर पैसा कमा रहे हैं
फिर भी प्रशंसा पा रहें हैं।

निंदा नहीं कर रही पुष्पा
निदान मांग रही  है
भ्रमित मंजर से उबारने का
प्रमाण मांग रही है।
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भ्रांतिमान अलंकार-:जुखाम को कोरोना के लक्षण से
महामारी समझ भ्रांति से ।

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