Friday, August 7, 2020

कांकेर से मीरा आर्ची चौहान की रचना- सुख-दुख

रचनाकार-मीरा आर्ची चौहान
जिला -कांकेर, छग
शीर्षक-सुख दुःख से भिन्न अनंत सुख।
विधा-कविता, मुक्त छंद (,पुनरुक्तवदाभाष अलंकार)


शिव-शंभु की अराधना देता
अनंत सुख समृद्धि अपार।

राम-राघव भी भजे हैं जिन्हें,
अनंत अगोचर अगम अपार।

भोले-शंकर की महिमा गाते,
निराकार रूप को सब ध्याते।

सुख -दुःख से परे अनंत सुख,
जीवन भर वो हैं नित   पाते।।

परोपकार की भावना है जिसमें
भव से मुक्त अनंत सुख पाते।।

मीरा आर्ची चौहान
कांकेर,छग
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