जिला -कांकेर, छग
शीर्षक-सुख दुःख से भिन्न अनंत सुख।
विधा-कविता, मुक्त छंद (,पुनरुक्तवदाभाष अलंकार)
शिव-शंभु की अराधना देता
अनंत सुख समृद्धि अपार।
राम-राघव भी भजे हैं जिन्हें,
अनंत अगोचर अगम अपार।
भोले-शंकर की महिमा गाते,
निराकार रूप को सब ध्याते।
सुख -दुःख से परे अनंत सुख,
जीवन भर वो हैं नित पाते।।
परोपकार की भावना है जिसमें
भव से मुक्त अनंत सुख पाते।।
मीरा आर्ची चौहान
कांकेर,छग
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