Monday, August 17, 2020

बलौदाबाजार से संतराम कुम्हार की रचना- यादें

रचनाकार -  संतराम कुम्हार 
   जिला -  बलौदाबाजार (छ. ग.) 
   शीर्षक  -  " यादें "
     विधा - छंदमुक्त कविता 
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यादें, याद ही रह जाती है,
बीते लम्हें यादों का दौर शुरु कर जाती है। 
यादों का यादगार हो जाना, 
जिंदगी में नया रंग भर जाती है।। 

याद करुँ तुझे कि, 
यादों से तेरी दूर हो जाऊँ।
है दफन उल्फत-ए-मोहब्बत, 
कब्र से इसको कैसे जगाऊँ।। 

बेवफा तु भी नहीं, 
न ही मैं वफा कर पाया। 
दिल का दरवाजा बंद हुआ, 
यादों में ही याद कर पाया।। 

यादें तेरी कभी, 
कमजोर-सा कर जाती है। 
कभी जीवन में आगे बढ़ने की, 
नयी तालीम सीखा जाती है।। 

यादें तेरी बार-बार क्यों चली आती है। 
आँखों में आँसू का दरिया बहा जाती है। 
कोशिश तो करता हूँ याद न करुँ तुझे, 
पर दिल-ए-जख्म तुझे फिर से बुला लाती है।। 

तन्हाई से भरी न जाने कितनी रातें, 
गुजारी है तेरे इंतजार में।
गुमसुम सा मायूस बैठा हूँ, 
प्यार के इस बाजार में।। 

यादों पर राज करने वाली, 
यादों में कब तक सताओगे। 
मेरी सपनों की हुस्न मल्लिका,
अपना दीदार कब कराओगे।। 

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