Monday, August 17, 2020

जांजगीर-चांपा से गिरधारी लाल चौहान की रचना- याद

नाम----गिरधारी लाल चौहान
जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा---छंद मुक्त कविता (आजादी  पर आधारित)
शीर्षक --याद
व्याख्या ---कवि के द्वारा   अपने जीवन में  बिताए हुए पल और उनको क्या क्या याद आते हैं उनका वर्णन किया गया है ।
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         याद

             मेरे याद करने का, अलग तरीका है।
            बचपन में मैं जिसे, गुरुओं से सीखा है ।

कहा करते थे मेरे गुरु,जब समस्या आये याद कर लेना ।
मेरे इन बातों को  अपने मन के , पन्ने में  जरुर रख लेना ।
    जब भी समस्या दिखा मैंने ,उनका सहयोग लिया है ।

         माता पिता अब हैं नहीं, वो भी याद आते हैं ।
       क्या कहूं प्रकृति को ये ,सबको खूब सताते हैं ।
        माता पिता के बिना भी, मैंने जीवन जीया है ।

      कुछ मित्र है मेरे  बचपन के, जो बहुत याद आते हैं ।
      समय का चलता चक्र, मिलते  और बिछड़ जाते हैं ।
        क्यों मिलना और बिछड़ना, मेरे हाथों में  लिखा है ।

            मेरे कुछ रिश्तेदार,जिनका आशीष है मुझे ।
           जिनके चरणों की प्यास , लगता कभी न बुझे ।
         सोचता हूं उनसे क्यों मुझे  ,हर पल दूर रखा है ।

         मैं एक शिक्षक, शिक्षा देना है मेरा काम ।
          कर्म में ही कृष्ण दिखता, कर्म में ही राम ।
       अच्छे कर्म का अच्छा फल ,मिलता मैंने पढ़ा है ।

         यादों के समंदर का ये, कुछ बूंद हैं बातें ।
          कभी खत्म न होगी ,कहते दिन और रातें ।
         एक अंश ही हुआ अभी तक, यादों को पता है ।

गिरधारी लाल चौहान

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