जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा---छंद मुक्त कविता (आजादी पर आधारित)
शीर्षक --याद
व्याख्या ---कवि के द्वारा अपने जीवन में बिताए हुए पल और उनको क्या क्या याद आते हैं उनका वर्णन किया गया है ।
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याद
मेरे याद करने का, अलग तरीका है।
बचपन में मैं जिसे, गुरुओं से सीखा है ।
कहा करते थे मेरे गुरु,जब समस्या आये याद कर लेना ।
मेरे इन बातों को अपने मन के , पन्ने में जरुर रख लेना ।
जब भी समस्या दिखा मैंने ,उनका सहयोग लिया है ।
माता पिता अब हैं नहीं, वो भी याद आते हैं ।
क्या कहूं प्रकृति को ये ,सबको खूब सताते हैं ।
माता पिता के बिना भी, मैंने जीवन जीया है ।
कुछ मित्र है मेरे बचपन के, जो बहुत याद आते हैं ।
समय का चलता चक्र, मिलते और बिछड़ जाते हैं ।
क्यों मिलना और बिछड़ना, मेरे हाथों में लिखा है ।
मेरे कुछ रिश्तेदार,जिनका आशीष है मुझे ।
जिनके चरणों की प्यास , लगता कभी न बुझे ।
सोचता हूं उनसे क्यों मुझे ,हर पल दूर रखा है ।
मैं एक शिक्षक, शिक्षा देना है मेरा काम ।
कर्म में ही कृष्ण दिखता, कर्म में ही राम ।
अच्छे कर्म का अच्छा फल ,मिलता मैंने पढ़ा है ।
यादों के समंदर का ये, कुछ बूंद हैं बातें ।
कभी खत्म न होगी ,कहते दिन और रातें ।
एक अंश ही हुआ अभी तक, यादों को पता है ।
गिरधारी लाल चौहान
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