Saturday, August 1, 2020

कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- लक्ष्य

रचनाकार-नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, जिला-कांकेर
विषय- *लक्ष्य* ((विभावना अलंकार का उपयोग करते हुए)
दिनाँक-01.08.20
         *लक्ष्य*

धनुष पर बाण चढ़ाते 
           ही  लक्ष्य संधान हो गया,
मानो धनुर्विद्या के क्षेत्र में 
         नया अनुसन्धान  हो गया।

बिन घनश्याम के लगा ज्यौं 
          नाच उठे लक्ष्य रूपी मोर।

हमें ना डरना है ना 
      कदम पीछे हटाना है,
गिरकर भी आगे बढ़ना  
      और लक्ष्य पाना है।

विपदाएं चाहे कितनी 
        भी आएं,हार भी गए 
तो क्या लक्ष्य पर ही 
          नजर गड़ाना है।

ना आँधियों से ना 
          तूफानों से घबराना,
मंझधार में भी तैरकर 
          लक्ष्य को पाना है।

जिंदगी आसान नहीं ,
          कुछ कर जाना है,
मंजिल कदम चूमेगी ये 
        बतलाना है।
*व्याख्या*-प्रस्तुत कविता "लक्ष्य''में विभावना अलंकार का उपयोग करते हुए कहा गया है कि धनुष पर बाण चढ़ाने मात्र से लक्ष्य का सन्धान हो गया।
 दूसरा घनश्याम अर्थात बादलों के ही लक्ष्य रूपी मोर नाच उठे।
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      नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, कांकेर, (छ. ग.)

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