Saturday, August 1, 2020

रायपुर से एच-एस-अरमो की रचना- लक्ष्य

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*रचनाकार-एच-एस-अरमो"अरमान "
*निवास:-बैरन-बाज़ार,रायपुर ।
*जिला:-रायपुर,छत्तीसगढ़ ।
*विधा:-विभावना,अंलकार ।
*शीर्षक:-°° लक्ष्य °°   ।
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○○°°°~°°|| लक्ष्य ||°°~°°°○○
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जीवन का लक्ष्य,बना सूरज जैसा ,
पाओगे मंजिल,चमके लक्ष्य  वैसा ।

लक्ष्य पाने, आती बाधा अपार,
धैर्य,साहस व आत्मविश्वास के तार,
तभी होगे,अपनी मंजिल पर सवार,
बिन लक्ष्य,ज्ञान-सोच लक्ष्य अधूरा,
मिले साथ सबका, होगा कारज पूरा।

समय-प्रबंधन,सहयोग,उचित संगठन,
बेहतर कार्य योजना,है लक्ष्य-बन्धन ।

तरकश से निकले हुए तीरों  का,
बन्दूक से चली हुई गोलियों  का,
बिना लक्ष्य,लिखे दास्ताँ नाकामी का ।

वैज्ञानिकों ने,तभी पाया मुकाम,
बनाकर एक,लक्ष्य भरा   काम ,
चल पड़े,धुनी बन,उस धन के नाम ,
लगे रहते,लक्ष्य पाने,लगाते पूरा दम।

जीवन का,लक्ष्य बना,उनका मकसद,
जीवन को,मिले,उसके जीने का वजूद,
बिना लक्ष्य,जीवन हुआ,मृतक समान,
लक्ष्य भरे कदमों के,हो अमिट निशान।

नवीनतम सृजन की,होती पक्की धुन,
बया पक्षी बुने   ,तिनका-तिनका चुन ,
करती पूरा लक्ष्य,बनाअपना घोसला,
बच्चों की सुरक्षा देने,बनाती ये घोसला ।
राफेल जेट विमान,लक्ष्य भेदक है,
इसकी मारक क्षमता भी,सटीक है, इसकी,यही पहचान ने  ला दी   है,
चीन व पाक में,छायी कैसी मायूसी है।
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व्याख्या:-उपरोक्त रचना में लक्ष्य के विभिन्न आयामों को जोड़कर उसके संबंधो को बताया है ।
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