Tuesday, August 11, 2020

रायगढ़ से अजय पटनायक की रचना- कृष्ण

रचनाकार:- अजय पटनायक
स्थान:-तमनार,रायगढ़,
छत्तीसगढ़
विषय:- कृष्ण जन्माष्टमी
शीर्षक:- आयो ब्रज के लाल
विधा:- रोला छन्द
अलंकार:- उपमा

*आयो ब्रज के लाल*
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आयो ब्रज के लाल,देवकी के है नंदन।
सजे दीप का थाल,करें मिल करके बंदन।
झूले है दिगपाल,तिलक लगते चंदा।
खुशियों की है रात,जन्मदिन    कहूँ सुनंदा।
शुभ मंगल है आज,,नंद घर आये लाला।
लगे मोरनी केश,सजे है मोती माला।
कहते माखन चोर,शोर करते है ग्वाला।
मटकी सबके फोड़,सताये गोकुल बाला।
कांपे काले नाग,इंद्र भी शीश नवाते।
फूलों सा मुस्कान,पूतना को भी भाते।
नटखट है शैतान,सदा करते है चोरी।
माता है हैरान,बांधते फ़िरते डोरी।
बैठ कदम के डाल,मधुर  बांसुरी बजाते।
छुपा सभी के चीर,सखी को खूब सताते।
कृष्ण रचाते रास,गोपियाँ नाच नचाते।
बनके सबके मीत,,प्रीत के तान सुनाते।
बंशी बनके सौत,राधिका को ललचाते।
कान्हा के विन्यास,,बधू  रुकमणी रिझाते।
करके जग कल्याण,कंस पापी को मारे।
बचा द्रौपदी लाज,सुदामा दुख को तारे।
गीता का संदेश,सुना कर ज्ञान बढ़ाते।
पढ़ा धर्म का पाठ,महा भारत दिखलाते।
द्वापर के भगवान,सभी के पालन हारी।
अजया है गोपाल,कष्ट हरते गिरधारी।

               मौलिक रचना
             अजय पटनायक

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